त्रि-पुस्तक समीक्षा एवं लोकार्पण समारोह सम्पन्न



इतिहास, संस्कृति एवं स्थापत्य पर आधारित शोध पुस्तकों का हुआ लोकार्पण

बीकानेर। साकेत शिक्षण संस्था एवं टीम धरणीधर के संयुक्त तत्वावधान में स्थानीय जनता प्याऊ मार्ग स्थित धरणीधर रंगमंच पर रविवार, 24 मई को गरिमामय वातावरण में त्रि-पुस्तक समीक्षा एवं लोकार्पण समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा एवं शोध जगत से जुड़े अनेक विद्वानों, शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।

समारोह में डॉ. मुकेश हर्ष द्वारा रचित तीन महत्वपूर्ण पुस्तकों — “भारतीय संस्कृति, समाज और पुष्करणा”, “बीकानेर की छतरियाँ : स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन” तथा “चूरु जिले का स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन” — का अतिथियों द्वारा विधिवत लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।

स्वागत उद्बोधन में कार्यक्रम संयोजक आनंद जोशी ने कहा कि शोध एवं साहित्य समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं तथा ऐसे कार्यों को निरंतर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

पुस्तकों की समीक्षाओं में उभरी इतिहास और स्थापत्य की महत्ता

सर्वप्रथम “बीकानेर की छतरियाँ : स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन” पुस्तक की समीक्षा राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के डॉ. नितिन गोयल ने प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि पुस्तक में राजपरिवार के साथ-साथ गैर-शासकीय छतरियों का भी विस्तृत विवेचन किया गया है तथा स्थापत्य कला के विविध आयामों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि प्राचीन काल से लेकर वर्तमान समय तक निर्मित छतरियों में मुगल, राजपूत, बंगाली एवं ब्रिटिश स्थापत्य शैली का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।

दूसरी पुस्तक “भारतीय संस्कृति, समाज और पुष्करणा” की समीक्षा डॉ. अमित कुमार व्यास ने करते हुए कहा कि बीकानेर में निवास करने वाले समाजों का संस्कृति एवं सामाजिक संरचना में अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने स्थानीय समाजों एवं विभिन्न जातियों के गहन अध्ययन की आवश्यकता पर बल दिया।

तीसरी पुस्तक “चूरु जिले का स्थापत्य एवं कलात्मक अध्ययन” की समीक्षा राजकीय महारानी सुदर्शना महाविद्यालय की सहायक आचार्य श्रीमती सुनीता विश्नोई ने की। उन्होंने कहा कि पुस्तक में मंदिरनुमा छतरियों, हवेलियों एवं स्थापत्य कला का अत्यंत सुंदर एवं शोधपूर्ण वर्णन किया गया है, जो चूरु जिले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।

इतिहास के पुनर्लेखन पर दिया गया जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानंद व्यास ने कहा कि इतिहास को निष्पक्ष दृष्टिकोण से पुनर्लेखन की आवश्यकता है। उन्होंने शिक्षकों एवं शोधार्थियों से नए दृष्टिकोण के साथ कार्य करने का आह्वान करते हुए हरसंभव सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राजेन्द्र पुरोहित, प्राचार्य राजकीय डूंगर महाविद्यालय ने विज्ञान एवं इतिहास के पारस्परिक संबंधों पर आधारित शोध को समय की आवश्यकता बताया तथा शोधार्थियों को हरसंभव सहयोग देने की बात कही।

विशिष्ट अतिथि एवं राजुवास कुलगुरु डॉ. सुमंत व्यास ने कहा कि ऐसे शोध कार्य विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इतिहास विभाग, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय की विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि पुस्तकों में समाज एवं स्थापत्य के महत्वपूर्ण पहलुओं को गंभीरता से प्रस्तुत किया गया है।

अति विशिष्ट अतिथि एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष भंवरलाल भादानी ने कहा कि राजस्थान आर्कियोलॉजी एंड एपिग्राफी संस्था ऐसे शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्यरत है तथा डॉ. मुकेश हर्ष का शोधकार्य इसका उत्कृष्ट उदाहरण है।

राजकीय डूंगर महाविद्यालय के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. चंद्रशेखर कच्छावा ने इतिहास लेखन एवं पुनर्लेखन की आवश्यकता पर बल देते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा एवं पांडुलिपि संरक्षण को बढ़ावा देने हेतु केंद्र सरकार पुस्तक लेखन पर आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है।

समाजसेवी एवं रोटेरियन राजेश चूरा ने कहा कि इतिहास प्रत्येक विषय की आधारशिला है, इसलिए उसका अध्ययन सभी के लिए आवश्यक है। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग राजस्थान सरकार के उपनिदेशक डॉ. हरिशंकर आचार्य ने लेखक को उनके महत्वपूर्ण शोध कार्य के लिए बधाई दी।

क्षेत्रीय इतिहास और संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने का उद्देश्य

लेखक डॉ. मुकेश हर्ष ने बताया कि इन पुस्तकों के लेखन का उद्देश्य क्षेत्रीय इतिहास, कला एवं संस्कृति को शोध के माध्यम से व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँचाना है। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी विद्वानों, सहयोगियों एवं संस्थाओं का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन ज्योति प्रकाश रंगा ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन श्याम सुन्दर किराडू द्वारा प्रस्तुत किया गया।

इस अवसर पर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. महेन्द्र पुरोहित सहित डॉ. नरेन्द्र कल्ला, डॉ. सी.एस. मोदी, डॉ. राजेन्द्र, डॉ. पवन रॉकावत, डॉ. दिनेश सेवग, श्रीराम बिस्सा, सम्पत जोशी, लालचंद जोशी, दीपक हर्ष, शरद जोशी, चिराग हर्ष, आदित्य हर्ष, अनिरुद्ध हर्ष, नरेन्द्र व्यास, गिरिराज पणिया, उमेश पुरोहित एवं विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिक्षाविदों, शोधार्थियों, साहित्यकारों, विद्यार्थियों एवं गणमान्य नागरिकों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।




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