कोटगेट एवं सांखला फाटक योजना पर व्यापारियों और जनसंघर्ष समिति का विरोध






बीकानेर व्यापार एसोसिएशन एवं जन संघर्ष समिति ने कोटगेट एवं सांखला फाटक रेलवे क्रॉसिंग की समस्या के समाधान के नाम पर प्रशासन द्वारा प्रस्तावित योजनाओं को अव्यावहारिक, घातक और जानलेवा बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया है। समिति का कहना है कि यह योजना आमजन की सुविधा के बजाय केवल रेलवे को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है, जिससे शहरवासियों को भविष्य में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

समिति के अनुसार कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग पर 16 मीटर चौड़ी सड़क के स्थान पर केवल 4 मीटर चौड़ा और 2.5 मीटर ऊंचा अंडर ब्रिज प्रस्तावित किया गया है, जबकि बाकी सड़क पूर्ववत रहेगी और रेलवे फाटक भी पूरी तरह बंद नहीं होगा। ऐसे में यह व्यवस्था ट्रैफिक समस्या का समाधान करने के बजाय नई समस्याएं पैदा करेगी। व्यापारियों का कहना है कि बारिश के दौरान कोटगेट क्षेत्र का पूरा पानी अंडर ब्रिज में भर जाएगा, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ सकती है। प्रशासन द्वारा पंप और रेनवाटर हार्वेस्टिंग के जरिए पानी निकालने के दावे को भी समिति ने भ्रामक बताया है।

इसके अलावा अंडर ब्रिज के दोनों ओर चौराहे बनने से ट्रैफिक जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ने की बात कही गई है। समिति ने यह भी आरोप लगाया कि पैदल यात्रियों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए कोई सुरक्षित व्यवस्था नहीं की गई है। वहीं अग्निशमन वाहन, बड़ी एम्बुलेंस और पुलिस की बड़ी गाड़ियों के निकलने का भी कोई पर्याप्त रास्ता प्रस्तावित नहीं है।

सांखला फाटक को लेकर भी व्यापारियों ने गंभीर आपत्ति जताई है। समिति के अनुसार प्रशासन द्वारा सांखला फाटक को स्थायी रूप से दीवार लगाकर बंद करने की योजना बनाई गई है, जिससे बीकानेर के मुख्य बाजार, स्टेशन रोड और के.ई. रोड की कनेक्टिविटी पूरी तरह प्रभावित होगी। इसके विकल्प के रूप में कोयला गली और मटका गली के बीच प्रस्तावित 5-5 मीटर चौड़े अंडरपास को समिति ने पूरी तरह अपर्याप्त बताया है। उनका कहना है कि वर्तमान सांखला फाटक 14 मीटर चौड़ा है, जबकि प्रस्तावित रास्ता संकरी गलियों से होकर गुजरता है, जहां वर्तमान में एकतरफा यातायात व्यवस्था लागू है।

समिति ने बताया कि कोटगेट रेलवे फाटक दिनभर में करीब 60 बार बंद होता है, जिसमें 40 बार इंजन शंटिंग और 20 बार रेल आवागमन शामिल है। उनका आरोप है कि रेलवे इन योजनाओं के माध्यम से सालाना करीब 2 करोड़ रुपये की बचत करना चाहता है, लेकिन इसका खामियाजा बीकानेर की जनता को ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, ईंधन की बर्बादी और दुर्घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ेगा।

व्यापार एसोसिएशन और जन संघर्ष समिति ने कहा कि इस मामले को लेकर जोधपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई भी चल रही है। समिति ने प्रशासन से जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इन प्रस्तावित योजनाओं को तुरंत निरस्त करने और स्थायी एवं व्यवहारिक समाधान प्रस्तुत करने की मांग की है।


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