विश्व अस्थमा दिवस - अस्थमा का बेहतर नियंत्रण: हर सांस, स्वस्थ जीवन : डॉ. गुंजन सोनी*

 


बीकानेर* प्रतिवर्ष मई माह के प्रथम मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य अस्थमा (दमा) जैसी बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सही उपचार की जानकारी देना और इस बीमारी को अच्छी तरह नियंत्रित करके सामान्य जीवन जीने के तरीके बताना है। आजकल अस्थमा बहुत आम हो गया है, खासकर बच्चों और युवाओं में। लेकिन अच्छी खबर यह है कि सही जानकारी, नियमित दवा और कुछ सावधानियों से अस्थमा को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।


पढ़िए  डॉ. गुंजन सोनी, वरिष्ठ आचार्य एवं विभागाध्यक्ष, श्वसन रोग विभाग टीबी एवं चेस्ट अस्पताल, पीबीएम, 

सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर का यह विशेष आलेख 


*अस्थमा क्या है?*

अस्थमा फेफड़ों की नलियों (श्वासनलियों) की सूजन और संकुचन की बीमारी है। इसमें श्वासनलियां संवेदनशील हो जाती हैं और विभिन्न ट्रिगर्स से संकरी होकर सांस लेने में तकलीफ पैदा करती हैं। यह संक्रामक (छूत की) बीमारी नहीं है, बल्कि यह आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारकों के कारण होती है।


*मुख्य लक्षण*

- बार-बार सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई

- सीने में जकड़न या दर्द

- घरघराहट (Wheezing) की आवाज

- खांसी, खासकर रात में या सुबह जल्दी

- व्यायाम या ठंडी हवा में लक्षण बढ़ना


अगर आपके या आपके बच्चे में ये लक्षण बार-बार आते हैं, तो तुरंत चेस्ट स्पेशलिस्ट से संपर्क करें।


*आम ट्रिगर्स (उत्तेजक कारक)*

- धूल, मिट्टी, पॉलन (पराग)

- धुआं, सिगरेट का धुआं, मच्छर मारने वाली दवा/धूप

- सर्दी-खांसी, वायरल संक्रमण

- ठंडी हवा, मौसम परिवर्तन

- पालतू जानवरों के बाल या रोएं

- कुछ दवाएं (जैसे एस्पिरिन) और खाद्य पदार्थ

- तनाव और भावनात्मक उत्तेजना


*उपचार और प्रबंधन*

अस्थमा का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार दो प्रकार का होता है:


1. **नियंत्रक दवाएं (Controller medicines)**: इनहेलर (कोर्टिकोस्टेरॉइड) रोजाना लेनी होती हैं, भले ही लक्षण न हों। ये सूजन कम करती हैं।

2. **राहत देने वाली दवाएं (Reliever medicines)**: जैसे सैल्बुटामोल इनहेलर, जब अचानक दमे का दौरा पड़े तो इस्तेमाल करें।


**महत्वपूर्ण बातें:**

- इनहेलर का सही तरीके से इस्तेमाल सीखें (स्पेसर के साथ बेहतर है)।

- पीक फ्लो मीटर से घर पर अपनी सांस की क्षमता नियमित जांचें।

- डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा कभी भी खुद बंद न करें।

- एलर्जी टेस्ट करवाकर ट्रिगर्स की पहचान करें।


 *बचाव के उपाय (Prevention Tips)*

- घर को साफ और धूल-मिट्टी मुक्त रखें। गद्दे, तकिए पर एलर्जी प्रूफ कवर लगाएं।

- फर्श पर गलीचा कम इस्तेमाल करें, वैक्यूम क्लीनर का प्रयोग करें।

- सिगरेट का धुआं घर में बिल्कुल न आने दें।

- सर्दी-खांसी से बचाव करें, फ्लू का टीका लगवाएं।

- स्वस्थ आहार लें, नियमित व्यायाम करें (लेकिन डॉक्टर की सलाह से)।

- आउटडोर प्रदूषण ज्यादा हो तो मास्क पहनें।



अस्थमा वाले अधिकांश मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं—पढ़ सकते हैं, खेल सकते हैं, नौकरी कर सकते हैं और परिवार की जिम्मेदारियां निभा सकते हैं। बस जरूरत है नियमित इलाज, डॉक्टर के साथ निरंतर संपर्क और खुद की निगरानी की।


अगर आपके या आपके परिवार में कोई भी अस्थमा से संबंधित समस्या है, तो टीबी एवं चेस्ट अस्पताल, पीबीएम, बीकानेर में श्वसन रोग विभाग से संपर्क करें। हमारी टीम आपकी पूरी मदद करेगी।

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