“गायब, IV सेट लापता… CCTV ख़राब , व्हील चेयर गेट पर नहीं और मार खाते रेजिडेंट डॉक्टर!”
पीबीएम में सुविधाएं गायब, जिम्मेदार भी नदारद!
सो रहे है ट्रॉमा सेंटर के HOD साहब ,घर पर मरीज देखने से फुर्सत नहीं , दुकानदारी संभालने में व्यस्त है सभी सीनियर डॉक्टर ।
प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री जिला प्रभारी मंत्री भी है फिर भी नहीं हो रहा एक्शन ।
सभी डॉक्टर्स ने हर तरह की दुकान चाहे जांच हो , एक्स रे हो या दवाई की हो घर में या घर के पास लगा दी अब उसे चलाना है तो फ्री की सुविधा कैसे मिलने दी जा सकती है अस्पताल में शायद हो सकता ये कमियां जानबूज़कर दूर नहीं की जाती ताकि मरीज थक हारकर डॉ के घर पर ही जाए और मरीज की जगह उसका ग्राहक बन जाए ।
बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में इन दिनों हालात कुछ ऐसे नजर आ रहे हैं कि मरीजों के इलाज से ज्यादा चर्चा व्यवस्थाओं के ‘इलाज’ की हो रही है। कहीं कैनुला और IV सेट नहीं मिल रहे, कहीं व्हीलचेयर की कमी है, तो कहीं रेजिडेंट डॉक्टर अस्पताल की खामियों का खामियाजा भुगतते हुए मरीजों और परिजनों के गुस्से का सामना कर रहे हैं।
आरोप यह भी हैं कि अस्पताल के कुछ विभागों में पीने के पानी तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। गर्मी के इस मौसम में कई जगह कूलर और पंखे या तो बंद पड़े हैं या पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। मरीज, परिजन और स्टाफ सभी परेशान हैं, लेकिन समस्याओं का स्थायी समाधान कहीं दिखाई नहीं देता।
ट्रॉमा सेंटर की स्थिति भी सवालों के घेरे में है। बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से बंद पड़े हैं। ऐसे में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
अस्पताल की हालत देखकर लोगों में यह कटाक्ष सुनने को मिल रहा है कि सुविधाएं शायद मरीजों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि बजट की फाइलों में टिक लगाने के लिए लाई जाती हैं। खरीदारी के समय व्यवस्थाएं दिखाई देती हैं, लेकिन जरूरत के समय उपकरण, संसाधन और सुविधाएं अक्सर गायब मिलती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की कमी, सुरक्षा उपकरणों की खराब स्थिति और संसाधनों का अभाव बना हुआ है, तब जिम्मेदार अधिकारी नियमित निरीक्षण क्यों नहीं कर रहे? आखिर मरीजों की परेशानी और डॉक्टरों पर बढ़ते दबाव की जिम्मेदारी कौन लेगा?
अस्पताल में चर्चा है कि यहां व्यवस्था का हाल ऐसा हो गया है कि जो सुविधाएं कागजों में मौजूद हैं, वे जमीन पर खोजने से भी मुश्किल से मिलती हैं, लेकिन किसी भी अव्यवस्था का जवाब देने के लिए सबसे पहले रेजिडेंट डॉक्टर ही सामने खड़े नजर आते हैं। आखिर व्यवस्था की बीमारी का इलाज कब होगा, यह सवाल अब मरीजों से लेकर अस्पताल स्टाफ तक सभी पूछ रहे हैं।

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