बीकानेर
राजस्थान में हाल ही में सामने आई वह घटना, जिसमें कथित रूप से बीकानेर से जयपुर जा रही बस को डूंगरगढ़ -रतनगढ़ मार्ग पर रुकवाकर लूटपाट की गई, कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऐसी घटनाएं आमजन के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती हैं और यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि आखिर अपराधियों में कानून का भय क्यों कम होता दिखाई दे रहा है।
सोशल मीडिया पर अक्सर पुलिस और आम नागरिकों के बीच बहस या विवाद के वीडियो वायरल होते रहते हैं, लेकिन दूसरी ओर अपराधी तत्व खुलेआम वारदातों को अंजाम देने का साहस कैसे जुटा रहे हैं, यह बड़ा प्रश्न है।
बीकानेर से नौरंगदेसर मार्ग पर यात्रा के दौरान भी यातायात नियमों की अनदेखी के कई उदाहरण देखने को मिले। कई पिकअप वाहन बिना नंबर प्लेट या अधूरी नंबर प्लेट के साथ सड़कों पर दौड़ते नजर आए। कुछ वाहनों में आगे नंबर अंकित था, लेकिन पीछे की नंबर प्लेट खाली थी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर नियमों की इस खुली अवहेलना पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन पर स्पष्ट नंबर प्लेट का होना केवल कानूनी औपचारिकता नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा और अपराध नियंत्रण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि किसी दुर्घटना, अपराध या अन्य घटना के बाद वाहन की पहचान ही न हो सके तो जांच प्रभावित हो सकती है।
आम नागरिकों का कहना है कि पुलिस द्वारा नियमित जांच अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई का फोकस केवल दस्तावेज जांच तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बिना नंबर प्लेट, संशोधित नंबर प्लेट और संदिग्ध वाहनों पर भी सख्त निगरानी जरूरी है।
राज्य में कानून-व्यवस्था को लेकर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि अपराधियों और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समान रूप से प्रभावी कार्रवाई हो। क्योंकि जब अपराधी बेखौफ नजर आते हैं और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं, तब व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
“अपराध पर सख्ती और नियमों का समान पालन ही जनता के विश्वास की सबसे बड़ी गारंटी है।”

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