कोटासर में सवामणि भंडारे के साथ भोमियाजी दादोसा महाराज के पांच दिवसीय मेले का समापन




भव्य जागरण में देर रात तक गूंजे भजन, सूडसर से पहुंचा ‘दादोसा रो लाडलो संघ’, श्रद्धालुओं ने लगाई धोक

कोटासर/श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ उपखंड के कोटासर गांव में भोमियाजी दादोसा महाराज के पांच दिवसीय मेले का शुक्रवार को चतुर्दशी के शुभ अवसर पर सवामणि भंडारे के साथ विधि-विधान से समापन हुआ। समापन अवसर पर मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भोमियाजी दादोसा महाराज के दरबार में पहुंचे और धोक लगाकर सुख-समृद्धि की कामना की।

मेले की पूर्व संध्या पर मंदिर परिसर में भव्य जागरण का आयोजन किया गया। इसमें हरिराम गुड़ा एवं मांगीलाल जाखासर ने भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को देर रात तक भक्ति रस में सराबोर किया। भजनों पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा मंदिर परिसर भोमियाजी दादोसा महाराज के जयकारों से गूंज उठा।

समापन दिवस पर मंदिर की विशेष सजावट की गई। पुजारी हरिदास स्वामी ने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना करवाई, वहीं अमर सिंह पड़िहार ने दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित की। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मंदिर में धोक लगाकर मन्नतें मांगी।

सूडसर से पहुंचा ‘दादोसा रो लाडलो संघ’, पुष्प वर्षा से हुआ स्वागत

चतुर्दशी के अवसर पर सूडसर गांव से दादोसा रो लाडलो संघ डीजे की धुन पर नाचते-गाते कोटासर पहुंचा। संघ के पहुंचने पर श्री भोमिया जी दादोसा सेवा समिति कोटासर की ओर से पुष्प वर्षा कर श्रद्धालुओं का स्वागत किया गया।

संघ में मुख्य प्रबंधक ठाकुर विजय सिंह राठौड़ का परिवार, स्वर्गीय ठाकुर गाड़ सिंह जी एवं मूल सिंह हंसावत के परिवार सहित बड़ी संख्या में संबंधी एवं श्रद्धालु शामिल रहे।

दादोसा महाराज सेवा समिति की ओर से संघ यात्रियों को दुपट्टा पहनाकर एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। संघ के आगमन से मेले का माहौल भक्तिमय हो उठा।

सवामणि भंडारे में श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

मेले के समापन अवसर पर आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं के लिए सवामणि भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें गांव के युवा कार्यकर्ताओं ने व्यवस्थाओं में सहयोग करते हुए प्रसाद वितरण की सेवा संभाली। भंडारे में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

इस प्रकार पांच दिवसीय मेले का समापन श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के वातावरण में हुआ।

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